विराट कोहली ने ड्रिंक्स इंटरवल का जो मुद्दा उठाया - क्या आईसीसी उस पर ध्यान देगी

आईसीसी द्वारा बनाई नई प्लेइंग कंडीशंस टेस्ट क्रिकेट में भारत- वेस्टइंडीज राजकोट टैस्ट और वन डे इंटरनेशनल में दक्षिण अफ्रीका-जिंबाब्वे सीरिज से लागू हो गई। आईसीसी की क्रिकेट कमेटी ने इन नई प्लेइंग कंडीशंस का सुझाव दिया, इन्हें सही शब्दों में लिखा एमसीसी ने और मंजूर किया आईसीसी ने। इन्हीं में से एक है टेस्ट क्रिकेट में ड्रिंक्स इंटरवल की नई कंडीशन।

अब ड्रिंक्स इंटरवल का नियम ये बना कि हर सेशन में दो ड्रिंक्स इंटरवल हो सकते हैं और दोनों के बीच 1 घंटा 10 मिनट का अंतर जरूरी है। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि समय खराब न हो। हां, अगर मौसम गर्म है तो अंपायर इससे ज्यादा ड्रिंक्स इंटरवल करा सकते हैं। कोई भी खिलाड़ी बाउंड्री लाइन पर या विकेट गिरने पर मैदान में ही ड्रिंक्स ले सकता है बशर्ते समय खराब न हो। मैदान में ड्रिंक लेने की बात तब आएगी जब कोई विकेट गिरा हो या और किसी वजह से अंपायर ने खेल रोक दिया हो। अगर कोई साझेदारी लंबी चलती है या किसी भी वजह से अंपायर खेल नहीं रोकते तो कोई सप्लाई नहीं होगी बीच-बीच में ड्रिंक्स की।

राजकोट टेस्ट के तीनों दिन बेहद गर्मी थी। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा था। ऐसी गर्मी में लगातार खेलते रहना बड़ा मुश्किल हो जाता है। फील्डिंग कर रही टीम के खिलाड़ी तो बाउंड्री लाइन पर ड्रिंक्स लेते रहे, गेंदबाजों को भी गेंदबाजी से हटाकर कप्तान ने राहत दे दी पर बेचारा बल्लेबाज क्या करे? पिच पर टिकने का मतलब है रन लेने के लिए भागना भी और इतनी ज्यादा गर्मी में बल्लेबाज को प्यास लगना बड़ी आम बात है। ज्यादा गर्मी में लंबी पारी खेलना बड़ा मुश्किल हो जाता है और टेस्ट क्रिकेट में ढेरों मिसाल है डिहाइड्रेशन की। जब सितंबर 1986 में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के डीन जोन्स ने 210 रन बनाए थे तो डिहाइड्रेशन के कारण उनकी हालत ये हो गई थी कि पारी के बीच में, ग्राउंड में ही उल्टी करते रहे। आउट होते ही उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा था।

गर्मी में इसी दिक्कत को देखते हुए विराट कोहली ने कहा कि या तो आईसीसी इस प्लेइंग कंडीशन में कुछ बदलाव करे या मैदान में मौजूद अंपायर गर्मी में कुछ विशेष रियायत दें। जहां एक तरफ, राजकोट में, बल्लेबाज गर्मी में बल्लेबाजी की दिक्कत का सामना करते रहे - चेतेश्वर पुजारा और अपना पहला टैस्ट खेल रहे पृथ्वी शॉ ने एक और रास्ता ढूंढा। बल्लेबाजी करते हुए उनकी जेब में पानी की छोटी बोतल थी और जब भी मौका मिला तो उसमें से एक-दो घूंट पी लेते थे प्यास बुझाने के लिए।

विराट कोहली ने तो यहां तक कहा कि टेस्ट में 5 विशेषज्ञ गेंदबाज खिलाने की एक वजह यह गर्मी भी थी क्योंकि उन्हें अंदाजा था कि इस गर्मी में गेंदबाज लंबे स्पेल नहीं फैंक पाएंगे।

ड्रिंक्स इंटरवल की यह नई प्लेइंग कंडीशन क्यों बनी और अब तक इससे हासिल क्या हुआ है। आईसीसी का इरादा खिलाड़ियों को पानी के लिए तरसाने का नहीं, खेल का समय बचाने का है। खिलाड़ी की जरूरत पर ड्रिंक्स ग्राउंड में आएं तो समय खराब होता है। व्यवस्था यह है कि एक घंटे में कम से कम 15 ओवर की गेंदबाजी हो। इस औसत से हर सैशन या हर दिन या हर टैस्ट में हासिल नहीं किया जा सका। गेंदबाजी कर रही टीम और खासतौर पर कप्तान पर जुर्माने लगे पर उससे ओवल गति नहीं सुधरी। धीमी ओवर गति में कुछ हिस्सेदारी ड्रिंक्स के लिए बार बार खेल रोकने की भी थी। इसीलिए आईसीसी ने बदलाव किया।

राजकोट में इसका फायदा मिला। भारत ने तो एक घंटे में 17 ओवर तक की गेंदबाजी की। एक घंटे में अगर लगातार 16-17 ओवर फेंक लिए जाते हैं तो खेल ही बदल जाएगा। इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया में जहां ‘समर’में भी मौसम इतना गर्म नहीं होता बल्लेबाज पानी मांगे बिना लंबी पारी खेल सकता है। राजकोट जैसी गर्मी में 40-45 मिनट बिना पानी बल्लेबाजी को विराट कोहली ‘अत्याचार’ मानते हैं।