एक सफल टी-20 क्रिकेटर बनने के लिए कुछ जरूरी टिप्स

क्रिकेट के विशेषज्ञों को अब यह बात भली-भांति समझ में आ गई है कि टेस्ट एवं एकदिवसीय क्रिकेट की तुलना में टी-20 क्रिकेट काफी अलग है। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि जो क्रिकेटर टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में सफल होते हैं, जरूरी नहीं है कि वे टी-20 क्रिकेट में भी सफल हों। वहीं यह भी हर्गिज जरूरी नहीं है कि एक सफल टी-20 क्रिकेटर अन्य दोनों प्रारूपों में भी सफल हो।

टी-20 क्रिकेट की बात करें तो यह प्रारूप खूब लोकप्रिय हो रहा है। बहुत से क्रिकेटर टी-20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में तो सक्रिय हैं ही, साथ ही जिन क्रिकेटरों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका नहीं मिल पाता या जो अपने देश के चयनकर्ताओं की स्कीम में नहीं होते, उनके लिए आईपीएल, बिग बैश लीग, कैरिबियन प्रीमियर लीग, बीपीएल जैसी अनेकों टी-20 लीगों में खेलने के विकल्प भी उपलब्ध हैं। इन टी-20 लीगों में खेलकर न केवल अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हो चुके क्रिकेटर के साथ-सात घरेलू और जूनियर क्रिकेटर भी पैसा बना रहे हैं। इसी के साथ युवा क्रिकेट प्रेमियों को अपनी प्रतिभा से परिचित भी करवा रहे हैं।

ऐसे में जो युवा क्रिकेट में, खास तौर पर टी-20 क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए ये टिप्स खासे उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

-टी-20 क्रिकेट में इस बात के कोई मायने नहीं हैं किसी बल्लेबाज का डिफेंस कितना अच्छा है, बल्कि मायने इस बात के हैं कि वह कितनी जोरदार हिटिंग कर सकता है। अतः बल्लेबाज को आक्रामक बल्लेबाजी तकनीक विकसित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि रक्षात्मक तकनीक विकसित करने पर।

-वैसे तो माना जाता है कि टी-20 क्रिकेट मुख्य रूप से बल्लेबाजों का खेल है और गेंदबाज तो महज गेंद फेंकने वाली मशीन की ही भूमिका निभाते हैं। वास्तव में ऐसा है नहीं। टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में उन गेंदबाजों को ज्यादा उपयोगी माना जाता है, जो विकेट निकालने में सक्षम होते हैं। वहीं टी-20 क्रिकेट में वे गेंदबाज भी कारगर माने जाते हैं, जो भले ही विकेट ज्यादा न निकाल पाते हों, लेकिन रन कम लुटाते हों और बल्लेबाजों को खुलकर शॉट्स न खेलने देते हों। अतः यदि कोई गेंदबाज टी-20 क्रिकेट में सफलता हासिल करना चाहता है तो वह विकेट निकालने के साथ-साथ किफायती गेंदबाजी करने पर भी खूब मेहनत करे।

-टेस्ट या एकदिवसीय क्रिकेट खेलते हुए क्रिकेटर को शारीरिक रूप से फिट होना बहुत जरूरी है। टी-20 क्रिकेट के लिए भी फिट होना बहुत जरूरी है, लेकिन यह कोई बेहद अहम शर्त नहीं है। कम ओवरों वाला प्रारूप होने के कारण टी-20 क्रिकेट में हुनर ज्यादा मायने रखता है। कुछ ही देर तक तो बल्लेबाजी, गेंदबाजी या फील्डिंग करनी होती है। ऐसे में क्रिकेटर, खास तौर पर गेंदबाज शारीरिक रूप से ज्यादा मजबूत न भी हो तो चलेगा, लेकिन वह तेजी से रन बनाने वाला या बेहद किफायती गेंदबाजी करने वाला और चुस्त-दुरुस्त क्षेत्ररक्षक अवश्य होना चाहिए। यही कारण है कि टी-20 क्रिकेट में आशीष नेहरा, ब्रैड हॉग और प्रवीण तांबे जैसे 39-40 साल से ज्यादा की उम्र के गेंदबाजों और एडम गिलक्रिस्ट जैसे बल्लेबाजों को भी खेलने का मौका मिला है।

-टी-20 प्रारूप में ऑलराउंडर क्रिकेटरों की बहुत उपयोगिता है। इस वजह से युवा क्रिकेटरों को चाहिए कि वे खुद को ऐसा ऑलराउंडर बनाएं, जो तेजी से रन भी बना सके और जरूरत पड़ने पर उपयोगी गेंदबाजी भी कर सके। साथ ही यदि वह एक मुस्तैद क्षेत्ररक्षक भी है तो उसकी टीम के लिए और अच्छा रहेगा।

-टी-20 मैच 20-20 ओवरों का मैच है, ऐसा नहीं सोचना चाहिए, बल्कि यह 120-120 गेंदों का मैच है, ऐसा सोचना चाहिए। आखिरी के 2 ओवरों में 30 रन चाहिए तो यह सुनने में बल्लेबाजी कर रही टीम के लिए एक खासा मुश्किल लक्ष्य प्रतीत होगा, लेकिन यदि इसे इस तरह से लिया जाए कि 12 गेंदों में 30 रन चाहिए तो फिर यह उतना मुश्किल लक्ष्य प्रतीत नहीं होगा। इन 12 गेंदों में यदि 2 छक्के और 2 चौके भी लग जाएं तो फिर 8 गेंदों में 10 रन बनाना कहां इतना मुश्किल है। वहीं गेंदबाजी के नजरिए से भी 1-1 डॉट बॉल का बहुत महत्व होता है।