नंबर 10 और 11 में न सिर्फ 249 रन जोड़े, अपने 100 भी बनाए

टूर टीम टेस्ट मैच का सिलासिला शुरू होने से पहले और टेस्ट के बीच जो प्रेक्टिस मैच खेलती है उन्हें पहले बहुत महत्व दिया जाता था। कई-कई मैच होते थे और इसलिए सीरीज लंबी हो जाती थी। विराट कोहली की टीम 30 जून को इंग्लेंड पहुंचेगी और 11 सितंबर को टूर 5 टेस्ट मैच की सीरिज के साथ खत्म हो जाएगा। 1946 में भारत की टीम इंग्लैंड टूर पर गई 3 टेस्ट की सीरिज के लिए तो खिलाड़ी 26 अप्रेल से पहुंचना शुरू हुए और टूर 10 सितंबर को खत्म हुआ।

उस दौर में भारत ने एक ऐसा मैंच खेला सरे काउंटी के विरूद्ध ओवल में जो अद्भुत था और इंग्लैंड में इसे आज तक याद किया जाता है। 1946 के उस इंग्लैंड टूर में सारे खिलाड़ी इकट्ठा होने के बाद भारत ने पहले दो मैच क्रमश: टूर स्टर शायर (16 रन से जीते) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (ड्रा) के विरूद्घ खेले। तीसरा मैच सरे विरूद्घ 11 से 14 मई तक ओवल में था। सरे थे कप्तान निज्ञेल बैनट थे। टूर में भारत के कप्तान इफ्तिखार अली खान पटौदी थे, पर सरे के विरूद्घ मैच में कप्तानी विजय मर्चेटं ने की थी।

एतिहासिक नजरिए से भारत का यह टूर बड़ा महत्वपूर्ण था क्योंकि दूसरे विश्व युद्घ के बाद इंग्लैंड में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी हो रही थी। ओवल स्टेडियम को तो विश्व युद्घ के सालों में पहले छावनी और फिर जेल में बदल दिया था। स्टेडियम पर बम भी गिरे। स्टेडियम की हालत सुधारी गई और वहां भी इसी मैच से क्रिकेट की वापसी हो रही थी।

मर्चेटं ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी को चुना और मर्चेटं (53) एवं गुल मौह मद (89) के बीच तीसरे विकेट की साझेदारी के बावजूद एक समय भारत का स्कोर 9 विकेट पर 205 था। भारत की पारी का अंत नजदीक देखकर सरे के कप्तान ने ग्राउंडस मैन को यह भी कह दिया था कि पारी खत्म होते ही पिच पर कैसा रोलर चलाना है और वे उसकी तैयारी करें।

नंबर 10 बल्लेबाज चंदू सरवटे क्रीज पर थे और उनका साथ देने आए नंबर 11 बल्लेबाज शूते बैनर्जी। हालांकि ये दोनों प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शतक बना चुके थे और कभी पारी की शुरूआत भी की थी पर यहां उनका नीचे के क्रम में बल्लेबाजी करना इस बात का सबुत था कि उनकी बल्लेबाजी को किनता भाव दिया जा रहा है। सरे के आक्रमण में तब एल्फ गावर, एलक बेडसर और एरिक बेडसर जैसे मशहूर गेंदबाज भी थे।

दोनों शुरू से आक्रमक खेले और कमाल ही कर दिया। अगले दो घंटे में 193 रन जोड़ दिए। दिन का खेल खत्म होने पर भारत का स्कोर 398-9 था तथा सरवटे 102 और बनर्जी 87 पर खेल रहे थे।

एक दिन के विश्राम के बाद जब खेल शुरू हुआ तो चर्चा ये थी क्या 10 वें विकेट की साझेदारी का 307 रन का रिकार्ड टूटेगा? इस चर्चा ने इन दोनों पर भी दबाव बना दिया और संभल कर खेले।

सबसे पहले 10 वें विकेट की साझेदारी का इंग्लैंड में बना 235 रन का रिकार्ड द्वारा टूटा. 3 घंटे 10 मिनट में 249 रन जोड़कर आखिर यह साझेदारी टूटी। सरवट ने 124* और बनर्जी ने 127 रन बनाए। नया और आश्चर्यजनक रिकार्ड यह है कि एक पारी में नबर 10 और 11 दोनों ने शतक बनाया। यह 10 वें विकेट की ऐसी आश्चर्यजनक साझेदारी थी जिसमें टीम के नंबर 10 और 11 शामिल थे।

भारत के 454 के जवाब में सरे की टीम 135 रन बनाकर आउट हो गई-बनर्जी ने 2 विकेट लिए। फालोऑन पारी में दूसरे दिन का खेल खत्म होने पर सरे का स्कोर 172-1 था। ग्रेगरी (100) एवं फिशलॉक (83) की कोशिश से वे बस पारी की हार बची। सरे नं 338 रन बनाए और सरवटे ने 5 विकेट लिए।

भारत ने मैच 9 विकेट से जीता 20-1 का स्कोर बनाकर मर्चेटं के साथ सरवटे ने पारी की शुरूआत की थी और सरवटे ही आउट हुए थे। यह आश्चर्यजनक मैच था क्योंकि नंबर 10 और 11 दोनों ने शतक बनाया।