क्या खत्म हो गया है दिनेश कार्तिक का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर?

टीम में किसी भी खिलाड़ी का चयन उसके प्रदर्शन के आधार पर ही होता है। कोई खिलाड़ी अगर लगातार बेहतर प्रदर्शन करता है तो ज्यादा दिनों तक उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता । टीम इंडिया के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है, जिन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन के बल पर पहले टेस्ट और अब वनडे टीम में अपनी जगह बना ली है। वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए चयनकर्ताओं ने जहां ऋषभ पंत पर भरोसा दिखाया है, वहीं उन्होंने दिनेश कार्तिक को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

कार्तिक पिछले काफी समय से खराब फॉम से जूझ रहे थे, जिसे देखते हुए एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली चयनसमिति ने उनकी जगह युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को टीम में शामिल करना ज्यादा बेहतर समझा। ऐसा नहीं है कि कार्तिक को मौके नहीं दिये गए, लेकिन वो बल्ले से बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम रहे। उनके हालिया प्रदर्शन की बात करें, तो पिछले 7 वनडे में उनके बल्ले से एक भी अर्धशतक नहीं निकला है। एशिया कप में उनके पास खुद को साबित करने का बेहतरीन मौका था लेकिन उसमें भी वह फ्लॉप रहे। सिर्फ वनडे में ही नहीं, इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी वह आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए। यहीं कारण था कि सीरीज के बीच में ही उनकी जगह टीम में ऋषभ पंत को शामिल किया गया था।

दरअसल दिनेश कार्तिक को इतने ज्यादा मौके मिलने की वजह थी उनके द्वारा निदहास ट्रॉफी में किया गया बेहतर प्रदर्शन। बांग्लादेश के खिलाफ खिताबी मुकाबले में आखिरी गेंद पर छक्का जड़कर ट्रॉफी जिताने वाले कार्तिक ने ना सिर्फ सेलेक्टर का भरोसा जीता था, बल्कि फैन्स के दिल में भी खास जगह बना ली थी। जो भी हो लेकिन कार्तिक को टीम से बाहर होकर ये अच्छी तरह से समझ जाना चाहिए कि एक कामयाबी के दम पर वह लंबे समय तक टीम में नहीं टिक सकते।

कार्तिक के टीम से बाहर होने के बाद एक तरह से अब उनका अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर खत्म होता हुआ दिखाई दे रहा है। चयनकर्ताओं ने पहले ही ये साफ कर दिया है कि वो विश्वकप से पहले धोनी के बैकअप के तौर पर ऋषभ पंत को ज्यादा से ज्यादा मौके देना चाहते हैं। सिर्फ विश्वकप ही नहीं चयनकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया दौरे को भी ध्यान में रखते हुए यह टीम सेलेक्शन किया है।

कार्तिक की अब टीम में वापसी इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि विश्वकप तक टीम इंडिया में महेंद्र सिंह धोनी की जगह बिल्कुल तय है, वहीं ऋषभ पंत भी शानदार फॉम में हैं। ऐसे में जब टीम में पहले से ही दो विकेटकीपर मौजूद हैं तो कार्तिक के आने का प्रश्न ही नहीं उठता।

एक तरह से देखा जाए तो कार्तिक ने अपने करियर में दूसरी बार मिले सुनहरे मौके को गवां दिया है। कभी महेंद्र सिंह धोनी से पहले साल 2004 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले कार्तिक ने उस दौरान भी अपने प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखाई थी, जिसके चलते उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा था। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कार्तिक को टीम इंडिया में विकेटकीपर के मुकाबले एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर ज्यादा मौके मिले हैं।

मौजूदा समय में खराब फॉम के चलते बल्लेबाज के तौर पर भी उनकी टीम में जगह नहीं बनती है। कार्तिक की बल्लेबाजी में सबसे बड़ी कमी यह है कि वो अच्छी शुरूआत करने के बाद भी अपनी पारी को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाते हैं। कार्तिक अगर मिले मौकों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते तो शायद आज वो टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी होते। मनीष पांडे और केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों को बाहर रख कर कार्तिक को बार-बार प्लेइंग इलेवन में जगह मिलने से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनपर कप्तान और कोच ने कितना भरोसा किया। इन सभी पहलुओं पर गौर किया जाए तो ये कहना गलत नहीं होगा कि क्या अब दिनेश कार्तिक को कभी दोबारा टीम इंडिया की तरफ से खेलना का मौका मिलेगा।