किसी भी टॉप टेस्ट टीम की 7 ऐसी खूबियां, जो टीम इंडिया में देखने को नहीं मिलती

भारत पिछले काफी समय से विश्व की नंबर 1 टेस्ट टीम बनी हुई है। किसी भी नंबर 1 टेस्ट टीम की पहली और सबसे प्रमुख विशेषता यह होती है कि वह दुनिया भर में अच्छा रिकॉर्ड रखती है, खासकर दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में। भारत जैसी नंबर 1 टेस्ट टीम के लिए इन देशों में जीतना अभी भी एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है।आईसीसी रैंकिंग सिस्टम की जटिल गणना में जाने से पहले आइए जांच करें कि वर्तमान भारतीय टीम अपने प्रदर्शन के आधार पर पूरी तरह से नंबर 1 टेस्ट रैंकिंग की हकदार है भी या नहीं। मौजूदा भारतीय टीम के पिछले 5 वर्षों के प्रदर्शनों को इस विश्लेषण का आधार बनाया गया है।

नंबर 1 टेस्ट टीम का विदेशों में रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए, लेकिन भारत का नहीं है

भारत ने 2013 में दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था। दक्षिण अफ्रीका ने 2 टेस्ट मैचों की सीरीज में भारत को 1-0 से हराया था। भारत ने 2014 में न्यूजीलैंड का दौरा किया था। न्यूजीलैंड ने पहला टेस्ट जीता था और दूसरा टेस्ट ड्रा के रूप में समाप्त हुआ था और इस प्रकार न्यूजीलैंड ने 1-0 से टेस्ट सीरीज जीत ली थी। फिर भारत ने 2014 में इंग्लैंड का दौरा किया था। 5 टेस्ट मैचों की सीरीज इंग्लैंड ने 3-1 के अंतर से जीती थी। भारत ने 2014 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। ऑस्ट्रेलिया ने 4 टेस्ट मैचों की वह सीरीज 2-0 से जीती थी। भारत ने 2018 के शुरू में फिर से दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था। भारत ने जोहांसबर्ग के तीसरे टेस्ट में जीत अवश्य हासिल की थी, लेकिन इससे पहले के दोनों टेस्ट मैचों में हारकर वे पहले ही सीरीज गंवा चुके थे। इसके बाद भारत ने हाल ही में इंग्लैंड का दौरा किया। 5 टेस्ट मैचों की सीरीज में मेजबानों ने उन्हें 4-1 से हराया।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि भारतीय टीम उक्त देशों में पिछले 5 सालों में टेस्ट सीरीज जीतने की स्थिति में कभी नहीं थी। किसी टीम के लिए एक विदेशी जमीं पर टेस्ट सीरीज हारना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन चैंपियन टीम से ऐसी उम्मीद बिल्कुल नहीं की जा सकती।

सभी तरह की परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बल्लेबाजों की भी कमी है टीम इंडिया में

यदि आप वाकई चैंपियन टीम हैं, तो आपके पास कम से कम 3 बल्लेबाज ऐसे होने चाहिएं, जो सभी तरह की परिस्थितियों में रन बना सकें। मौजूदा भारतीय टीम में केवल विराट कोहली के पास ही ऐसी खूबी है। अजिंक्य रहाणे को पहले विदेशी परिस्थितियों में कंसिस्टैंट बल्लेबाज माना जाता था, लेकिन बाद मे रहाणे ने अपनी निरंतरता खो दी। चेतेश्वर पुजारा के विदेशी आंकड़े भी औसत ही हैं। बाकी सब तो कामचलाऊ बल्लेबाज ही हैं, जो विदेशी दौरों पर टीम के लिए किसी बोझ की तरह ही होते हैं।

एक मैच में 20 विकेट लेने मे सक्षम कितने गेंदबाज हैं भारत के पास?

टेस्ट जीतने के लिए किसी भी टीम के पास ऐसे गेंदबाजों का होना जरूरी है, जो विपक्षी टीम के सभी 20 विकेट लेने में सक्षम हों। यह सच है कि वर्तमान भारतीय टीम के पास कई बहुत अच्छे तेज गेंदबाज हैं, लेकिन यह देखा जाता रहा है कि भारतीय गेंदबाज विपक्षी टीम के पुछल्ले बल्लेबाजों को शीघ्र आउट नहीं कर पाते। जो टीम टेस्ट में नंबर 1 हो, उसे यह बात जंचती नहीं।

किसी समय जैसा दबदबा वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया का था, वैसा भारत का नहीं है

किसी भी चैंपियन टीम की एक और खूबी यह होती है कि वह अवसरों को भुनाने में दक्ष होती है। किसी समय शक्तिशाली वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया टीम विरोधियों पर पूरी तरह से हावी होने में सक्षम थीं और उन्हें शिकंजे से निकलने का कोई मौका नहीं देती थीं। वर्तमान भारतीय टीम का विरोधी टीमों में ऐसा कोई खौफ और वर्चस्व नहीं है।

कोई वास्तविक ऑलराउंडर भी नहीं है भारतीय टीम में

विदेश में टेस्ट सीरीज जीतने के लिए किसी भी टीम के पास एक वास्तविक ऑलराउंडर होना जरूरी है। दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जीतने के लिए तो तेज गेंदबाजी करने वाला ऑलराउंडर होना चाहिए। हार्डिक पांड्या के रूप में भारतीय टीम के पास केवल एक ही ऑलराउंडर है, जो ज्यादातर मौकों पर निराश ही करता है। दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में इस साल की टेस्ट सीरीज में कुल 16 मौकों में से पांड्या ने केवल 3 मौकों पर ही उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, 2 बार बल्लेबाज के रूप में, जबकि एक बार गेंदबाज के रूप में।

चैंपियन टीम टॉस पर निर्भर नहीं करती

एक चैंपियन टीम टेस्ट जीतने के लिए टॉस के नतीजे पर भी निर्भर नहीं होती, जैसे कि टीम इंडिया रहती है। 80 के दशक में वेस्टइंडीज टीम का खौफ जब पूरी दुनिया में था, तो वहां एक कहावत थी कि "यदि विपक्षी टीम टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करती है तो एंडी रॉबर्ट्स और माइकल होल्डिंग की आग उगलतीं गेंदें उन्हें पस्त कर देंगी, जबकि यदि विपक्षी टीम टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनती है तो गोर्डन ग्रीनिज और डेसमंड हेंस के बल्ले की मार से तो विपक्षी टीम हर्गिज नहीं बच सकेगी।" ऐसा था उनका वर्चस्व।

टीम इंडिया की बात करें तो टॉस हारने का इन पर बहुत फर्क पड़ता है। नंबर 1 टेस्ट टीम को यह शोभा नहीं देता।

बेंच स्ट्रेंथ भी किसी नंबर 1 टेस्ट टीम के जैसी नहीं है भारत की

एक चैंपियन टीम के पास नए प्रतिभावान खिलाड़ियों का बड़ा पूल होना भी जरूरी है। यदि कोई खिलाड़ी अनफिट हो जाता है तो उसके स्थानापन्न के रूप में किसी अच्छे और दक्ष खिलाड़ी को ही मौका दिया जाना चाहिए। टीम इंडिया की तो स्थिति यह है कि यदि कोई प्रतिभाशाली और बड़ा खिलाड़ी अनफिट हो जाता है तो उसका स्थान लेने वाला सुयोग्य खिलाड़ी मिलता ही नहीं। मिलता भी है तो वह एकाध मौकों को छोड़कर निराश ही करता है।